Saturday, January 14, 2012

आज का सन्देश (14 .01 .2012 )


यदि मै एक क्षण खुश रहता हूँ, तो इससे मेरे अगले
 
क्षण मे भी खुश होने की सम्भावना बढ़ जाती है.
  • सीखी हुई ज्ञान विद्या सिर्फ दूसरों को सिखाना ही नहीं है, बल्कि ज्ञान को पहले स्वयं अपने जीवन की धारणा मे लायें, फिर आपका बोल गंभीर, ओजस्वी हो जायेंगा. कर्म करते हुए भी कर्मयोग मे रहेंगे, गुप्त पुरुषार्थ करो.
जीवन मे कभी भी अपने आप से उदास नहीं होना है.
चलते-चलते हमे उदासी आती है,
क्यों की हम अपने शरीर को लेकर सोचते रहते है.
इन सबको त्याग कर जीवन में
POSITIVE सोचकर अपने आप को भी साक्ष दो.
  •   उलटे-पुल्टे संकल्प नहीं आने चाहिए. अवगुणों को शरीर मे न आने दें. इधर की बात उधर, उधर की बात इधर, उलटी बातों को धारण  न करें. निंदा, चुगली का अवगुण अपने शरीर से निकाल बाहर फेकें.
कौन सी बात सिमरन कर अपार खुशी मे रहो? ? ?
  • खामियों का दान अगर भूल गए, तो परमात्मा/साथी को बताना है, मियां मिट्ठू नहीं बनना है. कभी भी रूठना नहीं है.
किसी का व्यव्हार आपकी बीमारी का कारण बनता है, तो रंज न करें.
दवाई कर ठीक करें अपने आप को,
स्वयं को दवाई नहीं करेंगे तो बीमारी ला-इलाज हो जायेगा,
तमाम उम्र तंग, परेशान करेगा.
  • हंस बगुलों के साथ रहता है तो उसका सत्यनाश हो जाता है. अपनी खामियों को ढूढ़ों. खामियों को दान देकर, फिर इसे वापिस ले लिया तो इसे परमात्मा /साथी को बताएं, तो आपको सजा नहीं देंगे.
  • सुना देगे वो ज्ञान का रास्ता. साफ़ दिखाई देगा.
  • इसका आधार है ज्ञान योग. SENSIBLE बने और अच्छे MANNERS ीखना और सिखाना है.
CHARITY BEGINS AT HOME .- - - FIRST 
THEN GIVE
ज्ञान-KNOWLEDE TO OTHERS .
  • आपस मे कभी भी रूठना नहीं है. झूठ और झूठे व्यक्ति से अपनी सम्भाल करनी है. अलबेलेपन  का शिकार नहीं होना है.
  • परमात्म प्यार मे समां जाओ. लवलीन स्थिति वाले सदा योगी है. याद स्वत: रहती है. साथ रहो, प्यार मे स्वत: MASTER प्यार के सागर बन जाओगे.   
मुसाफिर क्या बेईमान 
 

1 comment:

केवल राम : said...

एक बेहतर और प्रेरणादायी श्रृंखला ..keep it up....!