Thursday, November 17, 2011

आज का सन्देश (Thursday, 17 November 2011)


स्वयं पर घमंड न करो.
  • ज्ञान-वान बनने से धन-वान बन जाओगे. ज्ञानेश्वर ही राजेश्वर बनते है.
  • श्रेष्ठ तक़दीर बनाने के लिए, सर से पाप के बोझ को उतार दो, वि-कर्म न करो.
  • जीवन मे नियमावली से चलो.
रात के राही थक मत जाना, सुबह की भोर होने वाली है.   
  • ज्ञान को पाने के लिए, सोने (Gold) जैसे शुद्ध बुद्धि चाहिए.
KNOWLEDGE IS THE SOURCE OF INCOME.
  • पढाई से ही पद (Post) पाते हो.
सिमर-सिमर पाए ज्ञान, कलह, क्लेश मिटे, सब तन के.
  • ज्ञान से सपूत बनो या ज्ञान को ग्रहण कर कपूत बनो, अब आपके ऊपर है.
  • अपनी बुद्धि से समझो, ज्ञान के साथ योग करो. वि-कर्म विनाश होंगे, ज्ञान-वान, बल-वान बनेगे.
मन मना: भाव:
  • SILENCE बल से ज्ञानवान बनेगे, शांत रहना सीखे.
  • जहाँ कहीं कमी महसूस करते हो, अपने आप को Correct करें. वर्ना चलते-चलते एक दिन मर जायेंगे, पाप-बोझ को भी अपनी आत्मा के साथ ही ले जायेंगे.
  • पवित्र बने, शांत रहें, पाप कर्म न करे. सर्व-जिम्मेदारियों के बोझ को परमात्मा को दें, सर्व-उन्नति सहज होगी.
दिल और दिमाग मे HONESTY हो तो परमात्मा, परिवार, मित्र के विश्वास-पात्र हो जायेंगे.
 मुसाफिर  क्या  बेईमान 

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