Saturday, August 27, 2011

शांति ---क्रोध की

क्या देखी है,

अपनी परछाई

उस शांत ज्वालामुखी के

मुख मे, 

जो शांत झील बन गया है,

समा लिया है ---

फिर से उसने,

विद्रोह, गुस्सा,प्रलय और

सुब कुछ ----

शायद

फिर कभी

---------- दोबारा !


                                             मुसाफिर क्या  बेईमान
 
 

2 comments:

मुसाफिर क्या बेईमान said...

Reflection cannot be seen in the Boiling Water
In the Same Way
Truth cannot be Seen in a State of Anger.
Analyse Before you Finalize.

संजय भास्कर said...

सच्चाई को वयां करती रचना