Thursday, June 9, 2011

कदर-ए- तलख, जिन्दगी से

मरना कौन नहीं चाहता, 

मुसीबतों से धबरा कर,

चलते तो हम जिगर है, 

इस सफ़र मे साथ-साथ,
 
कहे सभी को, बार---बार,
 
समझे,
 
तो चलो भाई,
 
देखेंगे, सफ़र के दरमयां, 
 
क्या होता, मुसाफिर बेईमान,
 
तभी न करेंगे, 
 
तप्सरा,  

मुसाफिर क्या बेईमान.
 
     



- - -मुसाफिर क्या बेईमान

4 comments:

संजय भास्कर said...

... बेहद प्रभावशाली अभिव्यक्ति है ।

nitu said...

very very excellent poem.


Is sdi me jine ke liye kritrim hridey laga ke bhi ji le par rokti hai 20th sdi ki yade.

Dr.Nitu Sinha said...

प्रेरणा दायक अदम्य जिजीविषI

Dr.Nitu Sinha said...

sir i have opened my blog jindi nama and its address is:-

www.drnitusinha.blogspot.com

my new poem for you.